₹657 करोड़ का महाघोटाला: IDFC बैंक मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, हरियाणा और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी केस में दो चार्जशीट दाखिल
Major CBI action in the IDFC Bank case
Haryana News : Major CBI action in the IDFC Bank case, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के जरिए सरकारी धन के कथित दुरुपयोग से जुड़े बहुचर्चित मामलों में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने जांच को आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को दो अलग-अलग चार्जशीट दाखिल कर दीं। इनमें एक मामला हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों से जुड़े फंड के कथित दुरुपयोग का है, जबकि दूसरा चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) से संबंधित है। दोनों मामलों में अब तक सामने आए कथित वित्तीय नुकसान का आंकड़ा ₹657 करोड़ तक पहुंच चुका है।
सीबीआई की ओर से जारी जानकारी के अनुसार हरियाणा सरकार से जुड़े मामले में ₹504 करोड़ तथा चंडीगढ़ केंद्रशासित प्रदेश से जुड़े मामले में ₹153 करोड़ के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। एजेंसी ने साफ संकेत दिए हैं कि जांच अभी खत्म नहीं हुई है और आने वाले समय में और आरोप पत्र दाखिल किए जा सकते हैं।
हरियाणा केस में दूसरी चार्जशीट, दो निजी व्यक्ति आरोपी
सीबीआई ने हरियाणा सरकार के फंड के कथित दुरुपयोग मामले में पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में दूसरी चार्जशीट दाखिल की है। इस बार आरोप पत्र में दो निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार दोनों उन लोगों में शामिल हैं जिन्हें कथित अपराध से प्राप्त धन का लाभार्थी माना गया है। यह मामला पहले से ही बड़े स्तर की जांच के दायरे में रहा है। इससे पहले इसी प्रकरण में सीबीआई 15 आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। उन आरोपियों में तीन सरकारी कर्मचारी, छह बैंक अधिकारी, दो कंपनियां और चार निजी व्यक्ति शामिल थे। नई चार्जशीट के साथ इस मामले में जांच का दायरा और विस्तृत होता दिख रहा है।
चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी मामले में पहली बड़ी कार्रवाई
चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े मामले में सीबीआई ने पहली बार आरोप पत्र दाखिल किया है। यह चार्जशीट चंडीगढ़ स्थित विशेष सीबीआई अदालत में पेश की गई। इस मामले में कुल सात आरोपियों को नामजद किया गया है। इनमें पांच बैंक अधिकारी, सीएससीएल का एक अधिकारी और एक निजी व्यक्ति शामिल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार आरोपियों की भूमिका वित्तीय लेन-देन और धन के कथित अनियमित उपयोग से जुड़ी पाई गई है।
क्या है पूरा मामला, कैसे शुरू हुई जांच
सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का यह मामला पिछले कुछ समय से जांच एजेंसियों के रडार पर था। प्रारंभिक स्तर पर हरियाणा सरकार से जुड़े मामले की जांच राज्य विजिलेंस एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कर रहा था। यह मामला हरियाणा सरकार के आठ विभागों से जुड़े वित्तीय लेन-देन से संबंधित बताया गया था। बाद में मामले की गंभीरता और वित्तीय लेन-देन की प्रकृति को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी गई।
इसी तरह चंडीगढ़ से जुड़े दो मामलों की जांच आर्थिक अपराध पुलिस स्टेशन द्वारा की जा रही थी। इनमें चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और क्रेस्ट चंडीगढ़ से जुड़े पहलुओं की जांच शामिल थी। बाद में इन मामलों को भी सीबीआई ने अपने हाथ में लिया। जांच एजेंसी ने विभिन्न दस्तावेजों, बैंकिंग ट्रेल, वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों की भूमिका की जांच के बाद अब अदालत में आरोप पत्र पेश किए हैं।
इन धाराओं में दर्ज किए गए आरोप
सीबीआई के अनुसार दोनों मामलों में आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और धोखाधड़ी से संबंधित आरोप शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है। एजेंसी का कहना है कि आरोप पत्र जांच के दौरान एकत्र किए गए दस्तावेजी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर दाखिल किए गए हैं। हालांकि अंतिम दोष तय करने का अधिकार अदालत के पास रहेगा।
अभी खत्म नहीं हुई जांच, आगे और कार्रवाई के संकेत
सीबीआई ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि दोनों मामलों की जांच अभी जारी है। एजेंसी का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और लोगों की भूमिका सामने आने की स्थिति में अतिरिक्त चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती हैं। सरकारी धन के कथित दुरुपयोग से जुड़े इन मामलों में ताजा कार्रवाई को जांच की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब नजर अदालत की आगामी सुनवाई और सीबीआई की आगे की जांच पर रहेगी।